मैं जो भी हूं सिनेमा की वजह से हूं : शाहरूख खान

नयी दिल्ली, चार अगस्त :अभिनेता शाहरुख खान का कहना है कि दिल्ली की यादें उनके दिलों की गहराई में समाई है। चाहे वह सुबह चार बजे मूलचंद ढाबे पर पराठे खाने जाना हो, राजेंद्र नगर में गाड़ी चलाना हो या अपने माता-पिता से मिलने जाना हो। बीते दिनों को याद करते हुए शाहरुख खान ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि यह पिछले जन्म की बात है। फिल्में करते हुए अब काफी समय हो गया है।’’ अभिनेता ने साथ ही संजीदगी से कहा कि बड़े पर्दे का उत्साह हमेशा उनके निजी जीवन में नहीं उतरता। वह यह भी कहते हैं ‘‘मैं जो भी हूं सिनेमा की वजह से हूं ।’’ राष्ट्रीय राजधानी में अपनी फिल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’ का प्रचार करने आए शाहरुख बेहद चुप चुप से रहे और शोर, रंगों तथा लोगों से दूर एकांत की तलाश करते नजर आएं। ‘जब हैरी मेट सेजल’ आज बड़े पर्दे पर रिलीज हुई है। क्या दिलकश शाहरुख खान एक ही बातचीत के दौरान मजाकिया, आत्मविश्लेषी और दार्शनिक हो सकते हैं। पेश हैं किंग खान की जिंदगी, उनके रिश्तों और उनके सिनेमाई पहलुओं से जुड़े साक्षात्कार के कुछ अंश : प्रश्न- क्या आपको कभी शब्दों की कमी होती है? आप इतने साक्षात्कार दे रहे हैं लेकिन कोई भी एक सा नहीं है? उत्तर- मैं अपनी फिल्मों के बारे में बात करते हुए कभी नहीं ऊबता। ऐसा इसलिए नहीं है क्योंकि मुझे इसका जुनून है लेकिन इसलिए है क्योंकि मुझे लगता है कि यह मेरा कर्तव्य है। मैं सवाल का जवाब नहीं देता, मैं सवाल करने वाले के व्यक्तित्व को जवाब देता हूं। यह इस बात पर निर्भर करता है किसी ने कैसे सवाल पूछा, क्या वह गंभीर है, चंचल है या कूल बनने की कोशिश कर रहा है, मैं उसके अनुसार ही जवाब देता हूं। मैं एक अभिनेता हूं और मेरे लिए मुझसे सवाल करने वाला हर व्यक्ति एक विषय है। प्रश्न- क्या आपको एक किताब नहीं लिखनी चाहिए ? उत्तर- मैं एक किताब 20 वर्ष से लिख रहा हूं। एक दिन मैं उसे पूरी कर लूंगा लेकिन मैं तभी लिखता हूं जब मेरा लिखने का मन करता है। मैं उसे एक काम की तरह नहीं करता, मैं एक पेशेवर लेखक नहीं हूं। इसमें मेरी चुनिंदा यादें है और यह बिल्कुल निजी है। प्रश्न- आप एक ओर प्रफुल्लित व्यक्ति हैं और दूसरी ओर एकांत प्रिय अपने में रहने वाले, जो कि ‘जब हैरी मेट सेजल’ के आपके चरित्र से मेल खाता है। उत्तर- हैरी कुछ मायनों में उस व्यक्तित्व के थोड़ा करीब है। एक उत्साह है, जो अचानक से उत्पन्न होता है और इस वजह से लोगों को लगता है कि मैं हंसमुख व्यक्ति हूं। मैं लेकिन निजी जिंदगी में ऐसा नहीं हूं। मेरे परिवार में लोग कहते हैं, ‘‘यह हंसता या मजाक नहीं करता...फिल्मों में तो बहुत जीवंत लगता है।’’ प्रश्न- क्या यह आपके आस-पास मौजूद चीजों का प्रभाव है? उत्तर- मैं ज्यादा कुछ नहीं बता सकता। मैं यह सब कई वर्षों से कर रहा हूं। इसलिए कई बार (कई बार) दिल्ली आकर ऐसा प्रतीत होता है कि जैसा यहां रहना पिछले जन्म की बात हो।
Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com