बाल विवाह को ‘कतई बर्दाश्त नहीं करने’ की नीति अपनाई जाए : एनएचआरसी

भुवनेश्वर, पांच जनवरी: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने राज्यों से कहा है कि बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए इस सामाजिक कुरीति को कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनाई जाए और बाल विवाह रोकथाम अधिनियम, 2006 को सख्ती से लागू किया जाए। भारत में प्रतिदिन करीब 3,600 बाल विवाह होते हैं। एनएचआरसी के महासचिव अंबुज शर्मा ने कल बाल विवाह पर एक क्षेत्रीय सम्मेलन में कहा, ‘‘ 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का विवाह एक प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दा है। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय कार्य योजना लाना है।’’ शर्मा ने कहा कि सम्मेलन में कानून के प्रभावी क्रियान्वयन में प्रवर्तन एजेंसियों के समक्ष आने वाली चुनौतियों तथा बाल विवाह पर निगरानी रखने और उसकी खबर देने जैसे मुद्दों पर भी बातचीत की जाएगी। एनएचआरसी की एक विज्ञप्ति में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि दुनियाभर में होने वाले कुल बाल विवाहों में से 40 फीसदी से अधिक भारत में होते हैं। यहां प्रतिदिन 3,600 विवाह होते हैं। लेकिन इससे संबंधित चुनिंदा मामले ही दर्ज होते हैं। वक्तव्य में कहा गया कि एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2015 और 2016 में बाल विवाह रोकथाम अधिनियम के तहत महज 293 और 326 मामले ही दर्ज किए गए। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-4 के मुताबिक पश्चिम बंगाल में होने वाले कुल विवाहों में 40.7 फीसदी बाल विवाह होते हैं। इसके बाद 39.1 फीसदी के आंकड़े के साथ बिहार है। झारखंड में 38 फीसदी और राजस्थान में 35.4 फीसदी बाल विवाह होते हैं।
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