डीपीआईएल घाेटाला – विशेष सीबीआई अदालत ने कंपनी के प्रोमोटर और निदेशकों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज की

अहमदाबाद, 10 अप्रैल (वार्ता) सीबीआई की एक विशेष अदालत ने 2654 करोड़ रूपये के बैंक रिण धाेखाधड़ी प्रकरण में वडोदरा आधारित बिजली उपकरण निर्माता कंपनी डायमंड पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (डीपीआईएल) के प्रोमोटर सुरेश भटनागर और कंपनी के निदेशक के तौर पर नामित उनके दो पुत्रों अमित तथा सुमित भटनागर की अग्रिम जमानत अर्जी आज खारिज कर दी। विशेष जज एन जी दवे की अदालत ने गत सात अप्रैल को इस अर्जी पर सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा था। आज उन्होंने सीबीआई की दलीलों को मान्य रखते हुए अग्रिम जमानत अर्जियों को खारिज कर दिया। कंपनी के प्रोमोटर और निदेशकों ने दलील दी थी कि उनके खिलाफ किसी भी बैंक ने प्राथमिकी दर्ज नहीं करायी है। सीबीआई को अपने आप ऐसा करने का अधिकार नहीं है। दूसरी ओर जांच एजेंसी ने इसे एक गंभीर और सुनियोजित भ्रष्टाचार का मामला करार देते हुए जमानत अर्जी का विरोध किया था। ज्ञातव्य है कि कंपनी पर 11 निजी और सरकारी बैंकों तथा 8 वित्तीय कंपनियों से 2654 करोड़ की रिण धोखाधड़ी का आरोप है। सीबीआई ने पिछले हफ्ते इस सिलसिले में छापेमारी के बाद मामला दर्ज किया था। कल प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने भी वडोदरा में तीनों के ठिकानों पर छापेमारी के बाद धन शोधन निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज किया था। आज आयकर विभाग ने इनके ठिकानों पर छापेमारी की है। सीबीआई का आरोप है कि कंपनी ने बैंक के अधिकारियों की मिलीभगत से यह घोटाला किया। यह रिण 2008 से 2016 तक लिये गये थे। इसे बाद में एनपीए घोषित कर दिया गया था। मजेदार बात यह है कि जब यह रिण जारी किये गये थे तब रिजर्व बैंक ने कंपनी को अपनी काली सूची में डाल रखा था। ईडी इस बात की जांच कर रही है कि कही घोटाले की रकम का इस्तेमाल काला धन अथवा गैरकानूनी परिसंपत्ति बनाने के लिए तो नहीं किया गया।
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