रोजगार मानव प्रतिष्ठा का एक आधारभूत आयाम

अहमदाबाद 2 मई, अशोका न्यज:एक व्यक्ति के लिए रोजगार न केवल जीविका का साधन है बल्कि वास्तविक मानव प्रतिष्ठा की अभिव्यक्ति भी है। काम से जीविका, सम्मान, पहचान और मित्रता प्राप्त होता एवं पूर्णता की भावना का एहसास होता है। यह केवल वस्तु नहीं है किन्तु जीवन का अहम अंग भी है। भौतिक कल्याण के लिए अपरिहार्य, काम व्यक्ति के आध्यात्मिक विकास के लिए एक रास्ता है।

रोजगार आत्मानुभूति देता तथा व्यक्ति एवं समाज के बीच एक सेतु है। समुदाय के रखरखाव और संवर्द्धन के लिए काम करने की आवश्यकता है। मानव को कुछ हासिल करने की अंतर्निहित आवश्यकता होती है जो समाज द्वारा मान्यता और पहचान दी जाती है। काम से संतोष एवं सुख प्राप्त होता है जिसके लिए मेहनत करने की जरूरत पड़ती है।

काम का एक अधिकार भी है। मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा, साथ ही आईएलओ को बनाए रखने वाले सिद्धांतों ने, कार्य करने का अधिकार, रोजगार के चुनाव की स्वतंत्रता, काम करने के अनुकूल स्थितियों के अधिकार और बेरोजगारी के खिलाफ सुरक्षा का अधिकार स्थापित किया है।

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