शनि चंद्र योग की कुंडली वाला व्यक्ति नहीं बन पाता है अमीर, जीता है बदहाली का जीवन

अहमदाबाद: मई 20, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति के कारण व्यक्ति को अपने जीवन में सफलता और असफलता मिलती है।  जन्म कुंडली में ग्रहों के कुछ योग ऐसे भी बनते हैं, जिनसे व्यक्ति हमेशा गरीब रहता है और बदहाली का जीवन जीता है। ऐसा ही एक योग है विष योग।

कैसे बनता है विष योग

जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में चंद्रमा और शनि एक ही भाव में होते हैं तो विष योग बनता है। ये योग व्यक्ति के लिए बहुत ही दुर्भाग्यशाली माना जाता है। इस योग के कारण अपने जीवन में अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

 किस भाव में कैसा फल देता है विष योग

1. कुंडली के लग्न यानी पहले भाव में विष योग हो तो व्यक्ति जीवन भर किसी न किसी बीमारी से परेशान रहता है।
2. दूसरे भाव में विष योग हो तो व्यक्ति को जीवन भर पैसों की कमी रहती है।
3. तीसरे भाव में विष योग होने से मेहनत करने के बाद भी व्यक्ति काे कुछ नहीं मिलता।
4. चौथे और पांचवे भाव में विष योग हो तो संतान सुख नहीं मिलता।
5. छठे भाव में विष योग होने से दुश्मन और कर्ज बढ़ता जाता है।
6. सातवे भाव में विष योग होने से पति-पत्नी में विवाद होता रहता है।
7. आठवे भाव में विष योग होने से आयु का नाश और नवे भाव में होने से भाग्यहीन बनाता है।
8. दसवे भाव में विष योग हो तो पित से विवाद होता है।
9. विष योग ग्यारहवें भाव में हो तो एक्सिडेंट का योग बनता है।
10. बारहवें भाव में विष योग हो तो जीवन में परेशानियां बनी रहती हैं।

 
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