Watch : …. और क्रिया कर्म के तेरह साल बाद वो ‘ ज़िंदा ‘ लौट आया 

सुनने में कुछ अजीब लग सकता है और मैं आपको यक़ीन दिला दूँ कि ये कोई फ़िल्मी स्टोरी नहीं है। ये सच है सिरोही के नितोड़ा गाँव का। 
ये तेरह वर्ष पुरानी घटना है।  जब एक दिन धनाराम भील बकरियां चराने गया था।  जिसमें एक-दो बकरियां कम होने व अपनी मंद बुद्धि के चलते डर के कारण वह घर नही लौटा ओर भटकते-भटकते गुजरात के दयापुरा पहुंच गया। वहां उसकी मुलाक़ात  लक्ष्मण गरवाल से हुई।  और वो उसे अपने घर ले आया।  धनाराम भील तब से गरवाल के साथ ही रहने लगा। गरवाल ने उसका नाम पता जानने की काफी कोशिश की, मगर मंद बुद्धि होने के चलने वह नाम और गांव  नतोड़ा ही बता सका। इस बीच वक़्त गुजरता रहा। 
करीब 13 वर्ष बाद लक्ष्मण गरवाल यूट्यूब पर वीडियो देख रहे  थे जिसमे कोई नितोडा की खबर दिखी तो साथ बैठे धनाराम ने कहा यही है मेरा गांव।  लक्ष्मण ने  उस वीडियो के माध्यम से धनाराम के परिवार का पता लगाया |  परिवारजनों ने धनाराम को  मृत समझ कर अंतिम संस्कार कर दिया था, उसके अचानक जिंदा घर लौट आने पर पूरे  परिवार की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। आज गाँव  के लोग भी धनाराम के सकुशल लौट आने की खुशी मना रहे है।
स्पेशल रिपोर्ट,
अशोका न्यूज़
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