बहुत ख़ास है 13 जुलाई की अमावस्या, इसी दिन सूर्यग्रहण भी, जरूर करें ये काम

JULY 09, 2018: हिन्दू धर्म में धार्मिक नजरिए से अमावस्या तिथि को बहुत अधिक महत्व माना जाता है। हर महीने चंद्रमा की कलाएं घटने और बढ़ने के कारण ही दो पक्ष होते हैं। इसी पक्ष में एक अमावस्या होती है जबकि दूसरी पूर्णिमा। सोमवार के दिन जो अमावस्या होती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहते हैं और जो अमावस्या शनिवार के दिन पड़ती है उसे शनि अमावस्या कहते है।

 आषाढ़ अमावस्या का महत्व
हिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की अमावस्या का विशेष महत्व होता है क्योंकि इस अमावस्या के बाद वर्षा ऋतु आती है। आषाढ़ अमावस्या पर दान और पूर्वजों की आत्मा शांति के लिए गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है।

बहुत खास है आषाढ़ की अमावस्या
इस आषाढ़ की अमावस्या दो दिनों तक रहेगी। 12 जुलाई को पितृकार्य अमावस्या और 13 जुलाई को आषाढ़ी अमावस्या। शास्त्रों के अनुसार पितृ अमावस्या पर पितरों की शांति के लिए किये गए कार्य शुभ माने जाते हैं। 12 जुलाई को पितृ कार्यों के लिए है और 13 जुलाई को सूर्योदय के समय अमावस्या की तिथि रहेगी।

अमावस्या पर साल 2018 का दूसरा सूर्य ग्रहण
इस अमावस्या पर साल का दूसरा सूर्य ग्रहण भी लगेगा। हालांकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।


अमावस्या के दिन चींटियों और मछलियों को आटा जरूर खिलाना चाहिए। ऐसा करने से पुण्य लाभ और धन लाभ होता है।

13 जुलाई को भारतीय समयानुसार सुबह 7 बजकर 18 मिनट सेकंड से शुरू होगा, जो कि 8 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। इस सूर्य ग्रहण का माध्यम काल 8 बजकर 13 मिनट पर होगा और मोक्ष 9 बजकर 43 मिनट पर होगा।

यह ग्रहण कर्क लग्न और मिथुन राशि में पड़ेगा। इसमें सूर्य और चंद्र दोनों मिथुन राशि में रहेंगे और लग्न में बुध और राहु रहेंगे।

बताया कि यह ग्रहण कर्क लग्न और मिथुन राशि में हो रहा है। इस कारण कर्क लग्न, कर्क राशि, मिथुन लग्न, मिथुन राशि वालों पर यह ग्रहण अशुभ प्रभाव डाल सकता है। वहीं सूर्य और चंद्र के एक साथ एक ही राशि में रहने से कर्क, मिथुन और सिंह राशि वालों को मानसिक कष्ट भी हो सकता है।

13 जुलाई को होने वाला सूर्य ग्रहण दक्षिण ऑस्ट्रेलिया और इसके आसपास दिखाई देगा। ज्योतिष के जानकारों के कहना है कि भले ही यह सूर्य ग्रहण भारत में आंशिक दिखाई देगा, लेकिन यहां इसका असर पड़ेगा। इसलिए थोड़ा सतर्क रहने की आवश्यक्ता है।

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