आपके मुख्य द्वार की नामप्लेट कैसे बनाएं आपको सौभाग्यशाली, जानिए ये 22 वास्तु टिप्स

अहमदाबाद, 22 जुलाई,2018:  वास्तु के अनुसार नेमप्लेट का विशेष महत्व होता है। ये मुख्य द्वार की शोभा बढ़ाने के साथ ही सकारात्मक ऊर्जा को भी अपनी ओर आकर्षित करती है। वास्तु के अनुसार नेमप्लेट का चुनाव कैसे करें? चलिए, हम बताते हैं-
1. नेमप्लेट मुख्य प्रवेश द्वार की बायीं ओर होनी चाहिए या फिर सुविधानुसार भी लगा सकते हैं।
2. नेमप्लेट मुख्य प्रवेश द्वार की आधी ऊंचाई के ऊपर होनी चाहिए।
3. नेमप्लेट वृत्ताकार, त्रिकोण एवं विषम आकृति में होनी चाहिए।
4. नेमप्लेट हिलनी नहीं चाहिए।
5. नेमप्लेट लिफ़्ट के सामने नहीं होनी चाहिए।
6. नेमप्लेट के सामने सफ़ाई संबंधी उपकरण नहीं रहने चाहिए।
7. नेमप्लेट टूटी-फूटी और कटी हुई नहीं होनी चाहिए।
8. नेमप्लेट पर अधिकतम दो लाइन में अपना नाम आदि लिखना चाहिए।
9. नेमप्लेट पर पशु-पक्षियों की सजावट नहीं करनी चाहिए।
10. नेमप्लेट का रंग घर के स्वामी की राशि के अनुरूप होना चाहिए।
11. नेमप्लेट के अक्षरों का अंकों के अनुसार मूल्यांकन करके उचित समीकरण बैठाना चाहिए।
12. नेमप्लेट में किसी भी तरह का छेद नहीं होना चाहिए।
13. नेमप्लेट पर धूल, गंदगी, मकड़ी के जाले वगैरह नहीं होने चाहिए।
14. नेमप्लेट की लिखावट व प्रकाश व्यवस्था अच्छी होनी चाहिए, ताकि पढ़ने में परेशानी न हो।
15. नेमप्लेट बनानेवाले को तय मजदूरी से अतिरिक्त उपहार राशि देनी चाहिए।
16. दो नेमप्लेट एक साथ नहीं होनी चाहिए. यदि दो नेमप्लेट आवश्यक हों, तो ऊपर वाली नेमप्लेट नीचे वाली से छोटी होनी चाहिए।
17. नेमप्लेट के पीछे जीव-जंतु, छिपकली आदि अपना बसेरा न बनाने पाएं, ऐसी सावधानी बरतनी चाहिए।
18. नेमप्लेट पर काली चींटियों का घूमना मंगलकारी होता है।
19. नेमप्लेट के निर्माण में सम संख्या में धातु व लकड़ी की क़िस्मों का उपयोग करना चाहिए. विषम संख्या में नहीं।
20. नेमप्लेट पर मुद्रित अक्षर व अंकों का अपने स्थान से खिसकना, टूटना या गिरना अशुभ संकेत है।
21. नेमप्लेट की स्थापना के बाद किसी सुहागन का कर-स्पर्श समृद्धि लाता है।
22. विशेष अवसर एवं तीज-त्योहारों पर नेमप्लेट को दूर्वा से नौ बार स्पर्श कराकर दूर्वा को बहते पानी या बहती हवा में छोड़ देना चाहिए।
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