जानिए, विज्ञान क्‍या कहता है चंद्र ग्रहण के बारे में

अहमदाबाद, 23 जुलाई (अशोनान्यूज़): 21वीं सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण 27 जुलाई को पड़ रहा है। ये चंद्र ग्रहण लगभग 1 घंटे 43 मिनट तक रहेगा। यह ग्रहण पूरे भारत में दिखाई देगा और इसे बिना किसी उपकरण के आसानी से देखा जा सकेगा। पूर्ण चंद्र ग्रहण 2018 की शुरुआत भारतीय समय के मुताबिक 27 जुलाई को रात 11 बजकर 54 मिनट 02 दो सेकेंड पर होगी। चंद्र ग्रहण 28 जुलाई को सुबह 3:49 बजे समाप्त होगा। इस चंद्र ग्रहण में चंद्रमा लाल रंग का दिखेगा, जिसे ब्लड मून भी कहा जाता है। जब पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा के दौरान चंद्रमा और सूर्य के बीच में आ जाती है और चंद्रमा धरती की छाया से छिप जाता है। इस स्थिति में जब हम धरती से चांद को देखते हैं तो वह भाग हमें काला दिखाई पड़ता है। इसी वजह से इसे चंद्र ग्रहण कहा जाता है। सबसे लंबे चंद्र ग्रहण के पीछे क्या है वजह इस बार चंंद्र ग्रहण के दौरान चंद्रमा पृथ्वी के बिल्कुल केंद्र से उत्तर से होकर गुजरेगा. ये स्थिति 1 घंटे 2 मिनट की होगी, इसी कारण इस बार ग्रहण लंबा होगा। साथ ही इस बार ल्यूनर एपोजी (पृथ्वी से सबसे दूरी पर स्थित चंद्रमा का आर्बिटल पॉइंट जिससे यह बहुत छोटा और दूर नजर आता है) भी है। यानि 27 जुलाई को चंद्रमा और धरती के बीच की दूरी सबसे ज्यादा होगी। यही कारण है कि ये चंद्र ग्रहण 21वीं सदी का सबसे लंबा चंद्र ग्रहण होगा। क्यों लाल दिखाई देता है चंद्रमा  आप सोच रहे होंगे कि चंद्र ग्रहण पर चंद्रमा लाल क्यों दिखाई देता है, दरअसल चंद्रग्रहण के समय जब सूरज और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आती है तो सूरज की किरण रुक जाती है। पृथ्वी के वातावरण की वजह से रोशनी मुड़कर चांद पर पड़ती है और इसी कारण चंद्रमा लाल नजर आता है। आपको बता दें कि जब पूर्ण चंद्रग्रहण होता है तभी ब्लड मून होता है।
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