मणिपुर मुठभेड़ : न्यायालय ने एसआईटी जांच में विलंब पर सीबीआई निदेशक को तलब किया

नयी दिल्ली , 27 जुलाई (भाषा) मणिपुर में सेना , असम राइफल्स और पुलिस द्वारा कथित तौर पर न्यायेतर हत्याओं और फर्जी मुठभेड़ की जांच में ‘‘ अनावश्यक रूप से लंबा वक्त ’’ लेने के लिए उच्चतम न्यायालय ने आज सीबीआई की एसआईटी की आलोचना की। साथ ही उच्चतम न्यायालय ने एजेंसी के निदेशक को 30 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अपने समक्ष उपस्थित होने के लिए समन भेजा। अदालत ने एसआईटी (विशेष जांच दल) की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त सोलीसीटर जनरल (एएसजी) मनिंदर सिंह से कहा , ‘‘ अपने लोगों से कहिए कि अगर वे इस काम को नहीं कर सकते हैं तो फिर छोड़ दें। अगर वे इसे नहीं कर सकते हैं तो उन्हें छोड़ने के लिए कहिए। ’’ एसआईटी की जांच को ‘‘ सांप - सीढ़ी ’’ का खेल बताते हुए न्यायमूर्ति मदन बी . लोकुर और न्यायमूर्ति यू . यू . ललित की पीठ ने अब तक जांच की प्रगति पर असंतोष जताया और कहा कि वह सीबीआई निदेशक से जानना चाहती है कि क्या कदम उठाए जाएं ताकि मामलों की जांच जल्द पूरा होना सुनिश्चित हो और अंतिम रिपोर्ट ‘‘ जल्द से जल्द ’’ दायर की जाए। पीठ को जब पता चला कि चार मामलों में आज दायर होने वाली अंतिम रिपोर्ट अब तक दायर नहीं की गयी हैं तो वह क्षुब्ध हो गई और सीबीआई के सक्षम अधिकारी द्वारा मंजूरी दिए जाने की ‘‘ धीमी प्रक्रिया ’’ के बारे में सवाल उठाए। एएसजी ने अदालत को बताया कि चार मामलों में अंतिम रिपोर्ट अब तक दायर नहीं की गयी हैं और चार में से दो मामलों में सक्षम अधिकारी द्वारा मंजूरी 24 और 26 जुलाई को दी गई। ? एएसजी ने कहा , ‘‘ शेष दो मामले मंजूरी के लिए अब भी लंबित हैं। ’’ एसआईटी के प्रभारी शरद अग्रवाल ने पीठ को बताया कि तीन और मामलों में फील्ड जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट जांच और मंजूरी के विभिन्न चरणों में है। पीठ ने कहा , ‘‘ हमारे विचार में जांच में नाहक लंबा वक्त लग रहा है और सीबीआई की अब तक की प्रगति से हम संतुष्ट नहीं हैं। ’’ पीठ ने कहा , ‘‘ इसे देखते हुए हम सीबीआई निदेशक से जानना चाहेंगे कि जांच को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए और अंतिम रिपोर्ट यथाशीघ्र दायर की जाए। हम चाहते हैं कि सीबीआई के निदेशक समय सीमा तय करें। ’’ पीठ ने सीबीआई निदेशक को सोमवार को ‘‘ व्यक्तिगत रूप से पेश ’’ होने का निर्देश दिया। अदालत मणिपुर में करीब 1528 न्यायेतर हत्याओं की जांच के लिए जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। अदालत ने पिछले वर्ष 14 जुलाई को एसआईटी का गठन किया था और मणिपुर में कथित तौर पर न्यायेतर हत्याओं में प्राथमिकी दर्ज करने और मामलों की जांच के आदेश दिए थे। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति लोकुर ने एएसजी से कहा कि सीबीआई के एसआईटी का अगर ऐसा रवैया है तो उच्चतम न्यायालय इस बारे में आदेश पारित करेगा। पीठ ने एएसजी से कहा , ‘‘ हम निर्देश दे सकते हैं और आपकी सहमति की जरूरत नहीं है। हम इसे जल्द से जल्द पूरा करना चाहते हैं। ’’
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