ट्राई चेयरमैन ने आधार संख्या सार्वजनिक कर गलत जगह दिखाया जोश

नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)| भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण के चेयरमैन आर. एस. शर्मा द्वारा उनके आधार को लेकर आलोचकों और हैकर्स दी गई खुली चुनौती देना गलत जगह पर जोश दिखाने जैसा है। ऐसा साइबर कानून के विशेषज्ञ मानते हैं। विशेषज्ञ के अनुसार, इससे आधार इकोसिस्टम की सुरक्षा को लेकर बहस कमजोर पड़ गई है। आर. एस. शर्मा ने 28 जुलाई को 12 अंकों वाली अपनी आधार संख्या ओ सार्वजनिक कर ट्विटर पर तूफान ला दिया। उन्होंने यह कदम एक सरकारी सेवक के रूप नहीं बल्कि भारत के एक सामान्य नागरिक के तौर पर उठाया, जोकि उन लाखों भारतीयों के लिए खतरनाक उदाहरण बन सकता है जिनमें निजता को लेकर अभी तक जागरुकता नहीं आई है। साइबर कानून विशेषज्ञ पवन दुग्गल ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, इस प्रकार की चुनौती देना गलत जगह पर दिखाया गया जोश है। वह खतरनाक राह पर चल रहे हैं जो आने वाले दिनों में नुकसानदेह हो सकता है क्योंकि उनका व्यक्तिगत और बैंक की जानकारी अब सार्वजनिक हो चुका है। ट्राई के चेयरमैन शायद भूल गए हैं भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) का केंद्रीय डाटा आधान सुरक्षित हो सकता है लेकिन कई तीसरा पक्ष वेंडर अब प्रमुख दस्तावेज के तौर पर आधार स्वीकार कर रहे हैं जिससे उसका दुरुपयोग हो सकता है क्योंकि देश का साइबर सुरक्षा कानून कमजोर है। दुग्गल ने दुख जाहिर करते हुए कहा, आधार के दुरुपयोग को लेकर देशभर में कई मामले दर्ज किए गए हैं। आधार के प्रति लोगों के विश्वास में कमी आई है और इस स्थिति में आधार की सुरक्षा पर व्यापक कार्य करने के बजाय हम देख रहे हैं सरकार के शीर्ष पद पर बैठे अधिकारी आधार संख्या ट्विटर पर पोस्ट कर रहे हैं। नीतिपरक हैकर ने ट्राई चेयर के आधार संख्या से कम से कम 14 निजी जानकारी का खुलासा किया है जिसमें उनका मोबाइल नंबर, घर का पता, जन्म तिथि, पैन नंबर और मतदाता पहचान पत्र शामिल हैं। शर्मा ने एक फ्रांसीसी सुरक्षा विशेषज्ञ को ट्वीट करके कहा, आपके पास अब मेरा आधार नंबर है। अगर आप मुझे कोई नुकसान पहुंचा सकते हैं क्या आप मुझे कोई नुकसान पहुंचा सकते हैं? इलियट एल्डर्सन उपनाम का वह विशेषज्ञ ट्विटर हैंडल 'एट द रेट एफएस शुन्य सी 131 वाई ' का इस्तेमाल करता है और उनकी व्यक्तिगत जानकारी हर जगह ट्विटर पर आने लगती है। एल्डरसन ने जवाब में कहा, अगर आपका मोबाइल नंबर, पता, जन्म तिथि, बैंक खाता और अन्य व्यक्तिगत जानकारी इंटरनेट पर आसानी से मिल जाती है तो आपकी कोई निजता नहीं है। कहानी समाप्त। दुग्गल के अनुसार, व्यक्तिगत जानकारी में सेंधमारी मोबाइल फोन से शुरू होती है और दुख की बात यह है कि यूरोपवासियों और अमेरिकावासियों के विपरीत अधिकांश भारतीयों में अब भी निजता को लेकर कोई जागरुकता नहीं है।
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