ज्योतिष: आज है शनिश्चरी अमावस्या, शनिदेव को प्रसन्न करने का है श्रेष्ठ दिन, ऐसे करें उपाय

अगस्त 11, 2018: आज, 11 अगस्त को शनिश्चरी अमावस्या है। जो अमावस्या शनिवार को आती है उसे शनिश्चरी अमावस्या कहते हैं। ये एक दुर्लभ योग होता है। सावन मास में शनिश्चरी अमावस्या का योग होने से ये और भी खास हो गई है। आज न सिर्फ कुंडली में शनि के बुरे प्रभाव से राहत मिल सकती है, बल्कि अगर कुंडली में पितृदोष है तो उससे भी मुक्ति मिल सकती है। अमावस्या पितरों कि तिथि है इस कारण इस दिन निमित्त तर्पण आदि किया जाता है। शनि के साथ आप पितरों से जुड़े दोषों में भी राहत पा सकते हैं। इसके लिए आप कुछ छोटे-छोटे उपाय कर सकते हैं। जो आसानी से कहीं भी किए जा सकते हैं।

ये हैं उपाय

1 . शनिवार सुबह स्नान के बाद शनि मंदिर में काले तिल का तेल चढ़ाएं, काली चीजें, लोहा आदि चढ़ाएं। शनि मंदिर में बैठकर ऊँ प्रां प्रीं प्रों सः शनैश्चराय मंत्र का 108 बार जाप करें।
2 . शनिवार की शाम को सूर्यास्त के बाद पश्चिम की तरफ मुंह करके पीपल के पेड़ को तेल का दीपक लगाएं।
3 . पितृ दोष से मुक्ति के लिए शनिवार सुबह स्नान के बाद पीपल के पेड़ में गंगाजल, पानी, दूध, जौ, तिल और चावल मिलाकर चढ़ाएं। जल चढ़ाते समय ऊँ पितेृभ्यो नमः मंत्र का जाप करते रहें। इससे पितृदोष में राहत मिलेगी।
ये होता है पितृदोष का प्रभाव

- जिस घर में किसी सदस्य को पितृदोष होता है उस घर में अक्सर कोई ना कोई बीमार रहता है।
- पितृदोष के कारण घर के बच्चों में हमेशा कलह होता हैष
- जहां पितृदोष होता है वहां संतान पैदा होने में विलंब होता है।
- बिजनेस में लाभ नहीं होता, उधारी बहुत ज्यादा होती है।
- इंसान के पैसे उधारी में डूब जाते हैं या बेकार कामों में खर्च हो जाते हैं।
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