आज सावन मास के सोमवार को करें पार्थिव शिवलिंग की पूजा, कष्टों का होगा नाश, खुलेगा सुख-सम्पति का द्वार

अगस्त 13, 2018:  सावन मास को शिव का माह माना जाता है, इसलिए इस माह में पार्थिव लिंग बनाकर शिव पूजन का विशेष पुण्य मिलता है। कलयुग में कूष्माण्ड ऋषि के पुत्र मंडप ने पार्थिव पूजन प्रारम्भ किया। शिव महापुराण के अनुसार पार्थिव पूजन से धन, धान्य, आरोग्य और पुत्र की प्राप्ति होती है। पार्थिव पूजन से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है। शिवजी की अराधना के लिए पार्थिव पूजन सभी लोग कर सकते हैं, फिर चाहे वह पुरुष हो या फिर महिला। यह सभी जानते हैं कि शिव कल्याणकारी हैं। जो पार्थिव शिवलिंग बनाकर विधिवत पूजन अर्चना करता है, वह दस हजार कल्प तक स्वर्ग में निवास करता है।

शिव पुराण में भी मिलता है वर्णन

- शिवपुराण में लिखा है कि पार्थिव पूजन सभी दुःखों को दूर करके सभी मनोकामनाएं पूर्ण करता है।
- यदि प्रतिदिन पार्थिव पूजनकिया जाए तो इस लोक तथा परलोक में भी अखण्ड शिव भक्ति प्राप्त होती है।
- पूजन करने से पहले पार्थिव लिंग का निर्माण करना चाहिए। इसके लिए मिट्टी, गऊ का गोबर, गुड़, मक्खन और भस्म मिलाकर शिवलिंग बनाएं।
- शिवलिंग के निर्माण में इस बात का ध्यान रखें कि यह 12 अंगुल से ऊंचा नहीं हो। इससे अधिक ऊंचा होने पर पूजन का पुण्य प्राप्त नहीं होता है।
- मनोकामना पूर्ति के लिए शिवलिंग पर प्रसाद चढ़ाना चाहिए। इस बात का ध्यान रहे कि जो प्रसाद शिवलिंग से स्पर्श कर जाए, उसे ग्रहण नहीं करें।
नदी या तालाब की मिट्टी से बनाएं

- पार्थिव पूजन करने से पहले पार्थिव शिवलिंग बनाइए। इसको बनाने के लिए किसी पवित्र नदी या तालाब की मिट्टी लें।
- फिर उस मिट्टी को पुष्प चंदन इत्यादि से संशोधित करें। मिट्टी में दूध मिलाकर शोधन करें।
परम ब्रम्ह मानकर करें पूजा

- पार्थिव बनाने के बाद उसे परम ब्रम्ह मानकर पूजा और ध्यान करें। पार्थिव शिवलिंग समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करता है।
- सपरिवार पार्थिव बनाकर शास्त्रवत विधि से पूजन करने से परिवार सुखी रहता है।
रोगों से पीड़ित लोग करें महामृत्युंजय जाप

- पार्थिव के समक्ष समस्त शिव मंत्रों का जप किया जा सकता है। रोग से पीड़ित लोग महामृत्युंजय मंत्र का जप भी कर सकते हैं। - दुर्गासप्तशती के मंत्रों का जप भी किया जा सकता है। पार्थिव के विधिवत पूजन के बाद उनको श्री राम कथा भी सुनाकर प्रसन्न कर सकते हैं।
Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com