कम से कम पांच फीसदी ईवीएम और पेपर ट्रेल नतीजों का मिलान करने की इजाजत देनी चाहिए : कुरैशी

नयी दिल्ली, 14 अगस्त (भाषा) पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने आज कहा कि निर्वाचन आयोग को वोटिंग मशीनों के बारे में संदेहों को दूर करने के लिए कम से कम पांच फीसदी ईवीएम और ‘‘पेपर ट्रेल’’ पर्ची के नतीजों का मिलान करने की इजाजत दी जानी चाहिए। कुरैशी ने यह भी सुझाव दिया कि विजेता और पराजित होने वाले उम्मीदवारों को कोई दो इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) और उनके संबद्ध ‘‘वोटर वेरीफिएबल पेपर ऑडिट ट्रेल’’ (वीवीपैट) मशीनों के नतीजों का मिलान करने का मौका दिया जाना चाहिए। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा, ‘‘ईवीएम एक बहुत अच्छी चीज है। वीवीपैट के प्रावधान के बाद इस पर विवाद खत्म होना चाहिए। हालांकि, मैं हर निर्वाचन क्षेत्र में एक मतदान केंद्र पर सिर्फ एक फीसदी ईवीएम और वीवीपैट के नतीजे का मिलान किए जाने से खुश नहीं हूं।’’ उन्होंने यहां जामिया मिलिया इस्लामिया में एक परचर्चा के दौरान यह बात कही। गौरतलब है कि वीवीपैट एक ऐसा उपकरण है जिससे एक पर्ची निकलती है। उसमें उस पार्टी का चुनाव चिह्न अंकित होता है जिसके लिए मतदाता ने ईवीएम का बटन दबाया होता है। यह पर्ची सात सेकेंड के लिए दिखाई देती है और फिर यह एक बक्से में गिर जाती है। मतदाता इसे अपने घर नहीं ले जा सकता। दरअसल, यह मांग की जा रही है कि उन मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाए, जहां ईवीएम और वीवीपैट के नतीजों का मिलान किया जाने की इजाजत हो ताकि वोटिंग मशीन के किसी पार्टी के पक्ष में हैक किए जाने की चिंताओं को दूर किया जा सके। कुरैशी ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं का चुनाव एक साथ कराने के विषय पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि ‘‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’’ का अपना नफा - नुकसान हैं। हालांकि, यह प्रस्ताव कमजोर हो गया है और इस मांग का नैतिक अधिकार समाप्त हो गया है। उन्होंने ‘फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’’ और आनुपातिक प्रतिधिनित्व प्रणालियों की एक मिश्रित चुनाव प्रणाली की भी हिमायत की, ताकि किसी चुनाव में पार्टियों के 20 फीसदी वोट प्रतिशत हासिल करने के बावजूद उनके एक भी सीट हासिल नहीं कर पाने की स्थिति टाली जा सके। उन्होंने कहा कि ऐसा 2014 के चुनाव में उत्तर प्रदेश में बसपा के साथ हुआ था। जब वह 20 फीसदी वोटों के साथ तीसरे स्थान पर थी लेकिन उसे एक भी सीट नहीं मिल पाई। यह सहभागी लोकतंत्र के सिद्धांतों के खिलाफ है। भाषा
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