तंबाकू उत्पाद पैकेट के 85 प्रतिशत हिस्से पर होगी चेतावनी तस्वीर: न्यायालय

नयी दिल्ली, 14 अगस्त (भाषा) तंबाकू उत्पादों के पैकेट के 85 प्रतिशत हिस्से पर चेतावनी वाली तस्वीर छापना अनिवार्य रूप से जारी रहेगा। उच्चतम न्यायालय ने आज यह व्यवस्था दी। शीर्ष अदालत ने इससे पहले कर्नाटक उच्च न्यायालय के आठ जनवरी के उस आदेश पर स्थगन दिया था जिसमें 2014 के सरकार के पैकेजिंग के 85 प्रतिशत हिस्से में चेतावनी तस्वीर छापने के नियमन को खारिज कर दिया गया। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए एम खानविल्कर की पीठ ने अपने पूर्व के अंतरिम आदेश को आज ‘सनुश्चित’ कर दिया। अंतरिम आदेश में पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले को स्थगित किया था। पीठ ने कहा, ‘‘सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन पर रोक और व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण के नियमन) कानून, 2003 के मद्देनजर और सरकार द्वारा किए गए उपायों के तहत हमारा मानना है कि कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के क्रियान्यन पर स्थगन जारी रहना चाहिए।’’ अदालत ने अब इस बारे में कैंसर पेशंट एड एसोसिएशन, एनजीओ हेल्थ फार मिलियंस ट्रस्ट तथा उमेश नारायण, सभी की याचिकाओं को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। इन सभी याचिकाओ में उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी गई है। इससे पहले पीठ ने कहा कि वह भारतीय तंबाकू संस्थान (टीआईआई) की इस दलील से सहमत नहीं है कि अंतरिम स्थगन से तंबाकू विनिर्माताओं के कारोबार करने के बुनियादी अधिकारों का हनन होगा। अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने केन्द्र की तरफ से दलील रखते हुये कहा कि उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक जारी रखी जानी चाहिये और तंबाकू उत्पादों के पैकेट के 85 प्रतिशत हिस्से पर तस्वीर के रूप में दी गई स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचने संबंधी चेतावनी की अनुमति मिलनी चाहिये क्योंकि जनसंख्या का बड़ा हिस्सा अभी भी ज्यादा शिक्षित नहीं है।
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