अदालत ने चिटफंड कंपनियों की सीबीआई और ईडी जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगी

रांची, 26 अक्टूबर (भाषा) झारखंड उच्च न्यायालय ने चिटफंड कंपनियों की सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की जा रही जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगी है। मुख्य न्यायाधीश अनिरुद्ध बोस एवं न्यायमूर्ति डी एन पटेल की खंडपीठ ने शुक्रवार को कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सीबीआई और ईडी को 30 नवम्बर तक जांच की प्रगति रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अदालत ने सेबी से यह बताने को कहा है कि ऐसे मामलों में निवेशकों को राशि वापस करने के क्या नियम हैं और किस तरह उन्हें राशि वापस की जा सकती है। अदालत ने कोलकाता की फॉल्कन ग्रुप ऑफ कंपनी व फॉल्कन इंडस्ट्रीज ऑफ इंडिया, कोलकता के निदेशकों और अधिकारियों की संपत्ति की बिक्री और हस्तांतरण पर रोक भी लगा दी। अदालत ने कहा कि संपत्ति की बिक्री या हस्तांतरण के पूर्व उच्च न्यायालय की अनुमति लेनी अनिवार्य होगी। बिना अदालत की अनुमति के संपत्ति की बिक्री या हस्तांतरण नहीं किया जा सकता। अदालत ने दोनों कंपनियों को नोटिस जारी करके यह बताने को भी कहा कि निवेशकों की ओर से ली गई राशि कहां निवेश की गई है। सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से बताया गया कि इस मामले में जांच जारी है। चूंकि कई कंपनियों की जांच हो रही है, इस कारण इसमें समय लग रहा है। एक साथ सीबीआई को सभी मामले नहीं मिले हैं। क्रमवार मामले जांच के लिए सौंपे गए हैं। इस कारण एकसाथ जांच रिपोर्ट नहीं दी सकती। ईडी की ओर से भी जांच जारी रहने की बात अदालत को बतायी गयी। इस पर अदालत ने सीबीआई और ईडी को 30 नवम्बर तक जांच की प्रगति रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। इस मामले की अगली सुनवाई सात दिसम्बर को निर्धारित की गई। झारखंड के जिलों में चिटफंड कंपनियों ने लोगों से पैसे दोगुना करने और अधिक ब्याज देने के नाम पर लिये और एक- एक करके फरार हो गईं। पूरे मामले की सीबीआई जांच के लिए एक जनहित याचिका दायर की गई। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने सीबीआई और ईडी को जांच का आदेश दिया था। भाषा
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