भंवरी देवी हत्याकांड: जेल में बंद मलखान के बेटे और महिपाल की बेटी को कांग्रेस का टिकट

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 के लिए कांग्रेस ने अपनी पहली सूची जारी कर दी है. इस सूची में 152 प्रत्याशियों के नामों का ऐलान किया गया है. पार्टी ने अपनी पहली लिस्ट में जोधपुर जिले के 8 विधानसभा सीटों के टिकट जारी किए हैं. लूणी विधानसभा से पूर्व विधायक और भंवरी देवी हत्याकांड में जेल में बंद मलखान सिंह विश्नोई के पुत्र महेंद्र विश्नोई को कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाया है. भंवरी देवी हत्याकांड में ही जेल में बंद महिपाल मदेरणा की बेटी दिव्या मदेरणा को भी कांग्रेस ने ओसिया से टिकट दिया है. इसमें सरदारपुरा से पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, बिलाड़ा से हीरालाल मेघवाल, लोहावट से सत्यनारायण विश्नोई समेत कई दिग्गज नेताओं को टिकट दिया गया है. इनमें अशोक गहलोत, हीरालाल मेघवाल व भंवर बलाई के अलावा सभी नए चेहरे हैं. यह बात अलग है की मदेरणा परिवार की सीट ओसिया से दिव्या मदेरणा को प्रत्यशी बनाया गया है. वहीं भोपालगढ़ सीट से कांग्रेस ने अपने पुराने नेता भंवर बलाई को टिकट दिया है. सबसे चौंकाने वाला निर्णय जोधपुर शहर का रहा. कांग्रेस ने इस बार बड़ा बदलाव करते हुए इस सीट पर ओबीसी प्रत्याशी मनीषा पवार को मैदान में उतारा है. मनीषा पवार रावणा राजपूत समुदाय से आती हैं. एक टिकट से कांग्रेस ने आनंदपाल प्रकरण के बाद भाजपा से नाराज प्रदेश भर के रावणा राजपूतों को साधने का प्रयास किया है. वहीं जोधपुर शहर की तीसरी सीट सूरसागर का निर्णय अभी नहीं हुआ है. इस सीट पर पार्टी पहले से ही मुस्लिम कैंडिडेट उतारती आई है. माना जा रहा है की इस बार भी मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट दिया जाएगा क्योंकि पहले यह संभावना थी कि कांग्रेस सूरसागर से ब्राह्मण प्रत्याशी को टिकट देकर फलोदी से मुस्लिम प्रत्याशी को मैदान में उतारेगी. लेकिन सूत्रों के अनुसार सूरसागर से चुनाव लड़ने वाले जेफू खां ने फलोदी जाने से मना कर दिया.
इसके चलते कांग्रेस ने फलौदी में नए चेहरे के साथ ब्राह्मण प्रत्याशी महेश व्यास को मैदान में उतारा है. ऐसे में अब सूरसागर में एक बार फिर मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट मिल सकता है. यहां पर गहलोत बदलाव करते हैं तो बड़ी दावेदारी पूर्व महापौर रामेश्वर दाधीच की है. अगर दाधीच को कांग्रेस प्रत्याशी बनाती है तो वह भाजपा की प्रत्याशी सूर्यकांता व्यास को कड़ी टक्कर दे सकते हैं.
उधर शेरगढ़ में पार्टी को प्रत्याशी नहीं मिल रहा है, स्थानीय स्तर पर दो बार हार चुके उम्मेद सिंह की दावेदारी है, लेकिन वे भी राहुल गांधी की गाइड लाइन में फिट नहीं बैठते. ऐसे में इस सीट पर सस्पेंस बरकरार है.
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