राजस्थान : कांग्रेस ने भाजपा को रोका, हर बार सत्ता बदलने का 25 साल का ट्रेंड बरकरार

जयपुर. राजस्थान में हर पांच साल में सरकार बदलने का 25 साल से चला आ रहा ट्रेंड बरकरार रहा। कांग्रेस ने भाजपा को 73 सीटों पर रोक दिया। कांग्रेस ने 99 सीटें जीतीं। रालोद यहां कांग्रेस को समर्थन कर रही है, जिसके खाते में एक सीट आई है। इस तरह कांग्रेस को 100 सीटें मिली हैं। बहुमत के लिए 101 सीटें चाहिए। कांग्रेस ने बुधवार को विधायकों की बैठक बुलाई है। इस बीच, वसुंधरा राजे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। सरकार बनाने का भरोसा, दूसरे दलों के भी संपर्क में: कांग्रेस पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि राजस्थान में हमें जनादेश मिला है। कांग्रेस की सरकार बनेगी। उन्होंने निर्दलियों और भाजपा के उम्मीदवारों को भी सरकार में शामिल होने का खुला न्यौता दिया है। पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट ने भी सरकार बनाने का भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि हम कांग्रेस की विचारधारा में भरोसा रखने वाले उम्मीदवारों के भी संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि बीएसपी 3 सीटों और सीपीआई-एम 2 सीटों पर आगे है। हम इस तरह के दलों का भी स्वागत करेंगे। मुख्यमंत्री पद का दावेदार कौन ? अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री बनने के आसार ज्यादा हैं इसलिए कि गहलोत संकट मोचक हैं और अन्य दलों से उनका मैनेजमेंट भी अच्छा है। इसके पहले भी जब गहलोत मुख्यमंत्री थे तो उन्हें पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। 96 सीटों के साथ कांग्रेस सरकार बनी थी और गहलोत ने सफलतापूर्वक पांच साल राज किया था। सचिन पायलट चूंकि नए हैं, इसलिए कम सीटों की सरकार में उनके सीएम बनने की संभावना कम है। राजस्थान में सियासत का खो-खो खो-खो के खेल में खिलाड़ी बारी-बारी से जगह बदलते हैं। राजस्थान में भी हर पांच साल में सत्ता बदलती है। एक बार भाजपा आती है, एक बार कांग्रेस। सियासत का राजस्थान में यही खेल है। कांग्रेस 100 सीटों पर पहुंच गई है। 2013 में उसे महज 21 सीटें मिली थीं। कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी जीत यही है कि इन नतीजों ने प्राणविहीन पार्टी में प्राण फूंक दिए हैं और उसकी भाग्य रेखा खुल गई है। अब नजर इस पर है मुख्यमंत्री कौन बनेगा? सचिन पायलट साढ़े चार साल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं। उन्होंने पिछले उपचुनावों में कांग्रेस को जीत दिलाई है। लेकिन, कांग्रेस में आलाकमान में ही सारी चीजें तय करता है। 25 साल से ट्रेंड : हर चुनाव में बदलती है सरकार 1993 : भाजपा ने 38.60% और 95 सीटें लेकर सत्ता में वापसी की। कांग्रेस को 76 सीटें मिलीं। 1998 : कांग्रेस ने 44.95% वोट लिए। 153 सीटें जीतकर सरकार बनाई। भाजपा को 120 सीटें मिलीं। 2003 : भाजपा ने 39.20% वोट लेकर कांग्रेस को सत्ता से निकाला। भाजपा को 120, कांग्रेस को 56 सीटें मिलीं। 2008 : कांग्रेस ने 36.82% वोट लिए और 96 सीटें जीतकर सरकार बनाई। भाजपा को 78 सीटें मिलीं। 2013 : मोदी लहर में भाजपा ने 46.05% वोट और 163 सीटें लेकर कांग्रेस को 21 सीटों पर समेटा। 2018 : कांग्रेस ने 99 सीटें जीतकर वापसी की। भाजपा को 73 सीटें मिलीं। ढूंढाड़-मारवाड़ में भाजपा ने 60 सीटें हारीं यहां भाजपा की 91 सीटें थीं। अब 31 बचीं। आनंदपाल एनकाउंटर और पद्मावत प्रकरण से शेखावाटी में भाजपा की 12 सीटें कम हुईं। ढूंढाड़ में सचिन पायलट तो मारवाड़ में गहलोत का असर रहा। मत्स्य क्षेत्र में योगी ने हनुमानजी को दलित बताया था। राजपूत विरोध में आए। इस बार 1.52% कम वोटिंग हुई थी राजस्थान की 199 सीटों पर इस बार 74.08% मतदान हुआ था। राज्य में पिछली बार (75.67%) से 1.52% कम वोटिंग हुई। राज्य के 7 एग्जिट पोल्स में कांग्रेस को आगे दिखाया गया था। सिर्फ एक एग्जिट पोल में भाजपा के आगे रहने का अनुमान लगाया गया था। 66 साल में 14 चुनाव हुए 13 मुख्यमंत्री बने इससे पहले राजस्थान में 66 साल में 14 विधानसभा चुनाव हुए थे। सबसे ज्यादा 4 बार मोहन लाल सुखाड़िया और तीन बार भैरोंसिंह शेखावत सीएम रहे थे। सुखाड़िया करीब 16 साल 5 महीने और शेखावत 10 साल 4 महीने सीएम रहे, इन दोनों ने राज्य में करीब 44% समय तक शासन किया। पिछली बार भाजपा ने 13 जिलों में क्लीन स्वीप किया था भाजपा ने 2013 में राज्य के 33 में से 13 जिलों में क्लीनस्वीप किया था। यहां 59 विधानसभा सीटें हैं। 2013 में भाजपा ने अजमेर-8, बारां-4, चित्तौड़गढ़-6, डूंगरपुर-4, हनुमानगढ़-5, जैसलमेर-2, झालावाड़-4, कोटा-6, पाली-6, राजसमन्द-4, सवाई माधोपुर-4, सिरोही-3, टोंक-4 की सभी सीटें जीत ली थीं। उसके सामने इस प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती है। 2013 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का राज्य के 33 में से 17 जिलों में खाता तक नहीं खुला। इन जिलों में कांग्रेस के सामने प्रदर्शन सुधारने की चुनौती है। 2013 के चुनाव में 11 सीटों पर हार-जीत के अंतर से ज्यादा वोट नोटा को मिले थे 2013 विधानसभा चुनाव में पहली बार नोटा का इस्तेमाल हुआ। राज्य में 5.88 लाख यानी 1.91% वोट नोटा को मिले थे।
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