मोरारी बापू बोले, हनुमान जी वैज्ञानिक थे

भगवान हनुमान की जाति को लेकर चल रही बयानबाजी के बीच देश के प्रख्यात राम कथा वाचक मोरारी बापू ने हनुमान जी को वैज्ञानिक बताया है। बापू का कहना है कि 21वीं सदी में हनुमान जी को एक वैज्ञानिक के रूप में याद करना चाहिए। समय के अनुरूप में हमें हनुमान जी को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। मोरारी बापू ने कहा, हमें कोशिश करना चाहिए की हम भगवान की प्रतिमा को गंदा न करें। श्रद्धाभाव अपनी जगह सही है, लेकिन उड़द, तेल, सिंदूर जैसी चीजे अत्याधिक मात्रा में चढ़ाने से प्रतिमा गंदी होती है। श्रद्धाभाव अपनी जगह सही है, लेकिन उड़द, तेल, सिंदूर जैसी चीजे अत्याधिक मात्रा में चढ़ाने से प्रतिमा गंदी होती है। बापू ने कहा, पुरानी परंपराओं को भूलकर अब हमें हनुमान को नए तरीके से याद करना चाहिए। बापू ने इसी साल हनुमान जयंती पर एक धार्मिक आयोजन में कहा था कि युवाओं को हनुमान जी को केवल धार्मिक रूप में ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखना चाहिए। बापू ने हनुमान को वैज्ञानिक बताने के पीछे पांच वजहें गिनाई। मोरारी बापू के मुताबिक, हनुमान जी को व्यास(विस्तार) विज्ञान का ज्ञान था। हनुमान जी जरूरत पड़ने पर अपने रूप को बड़ा कर लेते थे। लंका दहन के समय देखा गया कि हनुमान जी की पूंछ काफी विशाल हो गई थी। इसके अलावा उन्होंने लंका में माता सीता को अपने स्वर्ण रूप की दर्शन कराया था।
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