बिहार विधानसभा: विपक्ष के हंगामे के बीच सवर्ण आरक्षण बिल पारित

बिहार विधानसभा में सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विकास मित्र के मानदेय में 2500 रु प्रतिमाह, टोला सेवक और तालीमी मरकज के मानदेय में प्रतिमाह 2000 रु और मध्यान्ह भोजन योजना के तहत कार्यरत रसोइया के मानदेय में 250 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की। दूसरी ओर हंगामे के बीच बिहार पदों एवं सेवाओं की रिक्तियों तथा शैक्षणिक संस्थानों में नामांकन में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण विधेयक, 2019 और बिहार निजी विद्यालय शुल्क विनियमन विधेयक 2019 सहित अन्य विधेयक विधानसभा से पारित कर दिया गया। इससे पहले विधानसभा में सोमवार को मुजफ्फरपुर बालिका अल्पावास गृह यौन शोषण मामले को लेकर विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण सभा की कार्यवाही करीब चार मिनट बाद ही स्थगित कर दी गई। विधानसभा की कार्यवाही पूवार्ह्न 11 बजे शुरू होते ही राष्ट्रीय जनता दल के भाई विरेंद्र, ललित यादव और आलोक कुमार मेहता ने कहा कि बच्चों को लैंगिक अपराध से संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम की विशेष अदालत ने मुजफ्फरपुर बालिका अल्पावास गृह यौन शोषण मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ संज्ञान लिया है, इसलिए मुख्यमंत्री को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। राजद सदस्य मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर शोरगुल करने लगे। इस पर विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने हंगामा कर रहे सदस्यों से पूछा कि क्या उनके पास अदालत का ऐसा कोई आदेश है। उन्होंने कहा कि कोई आरोपी अदालत में आवेदन देता और अदालत नियमित कार्य के तौर पर उसे अग्रसारित करता है तो उसे संज्ञान लेना नहीं कहा जाता। राजद के सदस्य नहीं माने और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर शोरगुल तथा नारेबाजी करते हुए सदन के बीच में आ गए। इसके बाद सभाध्यक्ष ने सभा की कार्यवाही दो बजे दिन तक के लिए स्थगित कर दी। सभा स्थगित होने के बाद राजद, कांग्रेस और भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी लेनिनवादी (भाकपा-माले) के विधायक विधान मंडल परिसर स्थित पूर्व मुख्यमंत्री स्वगीर्य कपूर्री ठाकुर की आदमकद प्रतिमा के सामने धरना पर बैठ गए। विपक्षी सदस्य 'सुप्रीम कोर्ट की फटकार, शर्म करो नीतीश सरकार और पोक्सो कोर्ट के आदेश का सम्मान करो, मुख्यमंत्री इस्तीफा दो' के नारे लगा रहे थे।
Social Media Auto Publish Powered By : XYZScripts.com