गुजरात: BJP से मिला ‘धोखा’, कराडिया राजपूतों ने कहा- लोकसभा चुनाव में सिखाएंगे सबक

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले गुजरात के सौराष्ट्र इलाके में कराडिया राजपूत बीजेपी के खिलाफ अपनी ताकत दिखाने की तैयारी कर रहे हैं. कराडिया राजपूतों का कहना है कि बीजेपी ने 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले उनसे जो वादे किये थे उन्हें पूरा नहीं किया गया, जिसके कारण वे प्रदर्शन करने पर मजबूर हो रहे हैं.
कराडिया राजपूत ओबीसी समुदाय से संबंध रखते हैं. 2017 के गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले समुदाय के लोग उस वक्त एकत्रित हो गए, जब जमीन के मुद्दे को लेकर भावनगर के नजदीक बुधेल गांव के पूर्व सरपंच दानसिंह मोरी को सस्पेंड कर दिया गया और उनका उत्पीड़न किया गया. कथित तौर पर इसके आदेश गुजरात बीजेपी प्रमुख जीतू वघानी ने दिए थे.
इस उत्पीड़न के खिलाफ कराडिया समुदाय के लोगों ने पूरे राज्य में प्रदर्शन किया. हालांकि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल और सौराष्ट्र के कराडिया समुदाय से आने वाले कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला के दखल के बाद प्रदर्शनों को रोक दिया गया.
45 साल के दानसिंह मोरी ने न्यूज18 से बात करते हुए कहा, "बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और बीजेपी के अन्य नेताओं के साथ मीटिंग के दौरान हमें आश्वासन दिया गया कि मेरे खिलाफ दर्ज पुलिस केस वापस ले लिए जाएंगे और हम प्रदर्शन वापस लेकर चुनाव में बीजेपी का समर्थन करेंगे. लेकिन आश्वासन के दो साल बाद भी कोई केस वापस नहीं लिया गया, मेरे खिलाफ नए केस दर्ज किए गए हैं और मेरे परिवार का उत्पीड़न जारी है. इसलिए बीजेपी को सबक सिखाने के लिए समुदाय के सदस्यों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने का फैसला किया है."
परंपरागत रूप से कराडिया राजपूत बीजेपी को वोट देते रहे हैं. भावनगर और जूनागढ़ लोकसभा सीट पर ये समुदाय निर्णायक साबित हो सकता है.
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